कुछ दिन बाकी दिनों से ज़्यादा भारी लगते हैं।

कोई बात नहीं। यहाँ थोड़ी देर उसी के साथ बैठ जाइए — और जब आप तैयार हों, तो आगे क्या करना है, वो हम साथ मिलकर देख लेंगे।

Delhi NCR, India में काउंसलिंग और भावनात्मक सहायता। हर session 1 hour का होता है, English या Hindi में।

शुरुआत यहाँ से

आज आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

कोई जवाब ग़लत नहीं है। यह बस इसलिए है ताकि हम आपको कुछ काम की चीज़ दिखा सकें।

आज आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
हम कौन हैं

दो लोग, एक सोफ़ा, और कोई फ़ाइल-फ़ॉर्म नहीं।

Delhi NCR की एक छोटी सी practice। अंदर आने से पहले ही आपको पता होगा कि आप किससे बात करने जा रहे हैं।

Nikita Vashistha, कैमरे की ओर देखती हुई।

Nikita Vashistha

  • Counselling Psychologist
  • Clinical Hypnotherapist
  • Certified POCSO Consultant

यानी — काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट, और सर्टिफ़ाइड हिप्नोथेरेपिस्ट।

निकिता ज़्यादातर उन बड़ों और किशोरों के साथ काम करती हैं जो अंदर से जितना उठाए हुए होते हैं, बाहर उतना दिखाते नहीं।

और पढ़ें (English)
Narender Vashistha, कैमरे की ओर देखते हुए।

Narender Vashistha

  • Career Counsellor
  • Certified Hypnotherapist
  • NLP Practitioner

यानी — खान-पान और जीवनशैली से जुड़ी सलाह, career counselling, और साथ चलने वाली complementary तकनीकें।

नरेंद्र छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के साथ दिशा, आदतों और दिन की रोज़मर्रा बनावट पर काम करते हैं।

और पढ़ें (English)

हिप्नोथेरेपी, NLP और खान-पान से जुड़ी सलाह counselling के साथ-साथ चलती हैं — उसकी जगह नहीं लेतीं।This is a complementary approach and not a substitute for medical or psychological treatment.

हम कैसे काम करते हैं, विस्तार से (English)

लोग हमारे पास क्या लेकर आते हैं

रोज़मर्रा की मुश्किल बातें, पूरी गंभीरता से।

  • चिंता / घबराहट

    दिमाग़ आगे-आगे भागता रहता है और कभी पूरी तरह शांत नहीं होता।

  • तनाव

    काम सब हो रहा है — बस अंदर कुछ बचा नहीं है।

  • रिश्ते

    वही बात, वही बहस — और बात कहीं पहुँचती ही नहीं।

  • आत्म-सम्मान

    वो आवाज़ जो किसी और के कुछ कहने से पहले ही आपको कम आँक देती है।

हम जिन चीज़ों पर काम करते हैं, सब देखें

The Café

छोटे-छोटे लेख, उन दिनों के लिए जब आप खुद ही सोचना चाहते हैं।

जो बातें सबसे ज़्यादा सामने आती हैं — चिंता, नींद, परिवार, और हर वक़्त ठीक दिखने का दबाव — उन पर सीधी-सादी बातें। इतनी बड़ी कि काम आएँ, इतनी छोटी कि पढ़ी जा सकें।

Café के लेख अभी सिर्फ़ English में हैं।

Café में जाएँ (English)

जब आप तैयार हों, तब।

पहली बातचीत में ज़्यादातर आप बोलते हैं और हम सुनते हैं। उसमें कुछ भी तय करना ज़रूरी नहीं है, और आप कभी भी रोक सकते हैं।