कुछ सवाल, जिनके साथ थोड़ी देर बैठा जा सके
तीन छोटे सेट। ये quiz नहीं हैं और इनका कोई जोड़ नहीं बनता — ये बस वो सवाल हैं जिनका जवाब कभी-कभी तब आसान हो जाता है जब कोई और पूछ दे।
ये बस सोचने के लिए कुछ सवाल हैं — न कोई टेस्ट, न कोई निदान। आख़िर में न कोई नंबर मिलेगा, न कोई नतीजा।
तनाव आपके यहाँ किस शक्ल में आता है?
तनाव आकर बताता नहीं कि वो आ गया है। छह सवाल — कि आपके यहाँ वो कहाँ उतरता है।
छह सवाल। आराम से पढ़ें तो दो-तीन मिनट।
अंदर कितना बचा हुआ है?
आप कितने व्यस्त हैं, यह नहीं — उसके नीचे कितना बचा है, यह। छह सवाल।
छह सवाल। दो-तीन मिनट।
अपने आप से बात करने का लहजा कैसा है?
दिमाग़ में चलती रहने वाली टिप्पणी का एक लहजा होता है। छह सवाल — कि वो लहजा क्या है।
छह सवाल। दो-तीन मिनट।
आपके जवाबों का क्या होता है
कुछ नहीं। न कोई नंबर, न कोई नतीजा, न कोई लेबल, न कोई ख़ाना। आख़िर में आपको बस एक छोटा-सा पैराग्राफ़ मिलता है — जो आपने चुना उसे लौटाकर पढ़ने जैसा — एक लेख जो शायद काम आए, और अगर मन हो तो किसी से बात करने का एक रास्ता।
आपके जवाब उसी browser tab में रहते हैं जिसमें आप यह पढ़ रहे हैं। वे न सहेजे जाते हैं, न कहीं भेजे जाते हैं, न गिने जाते हैं — न हमारे यहाँ, न कहीं और। tab बंद कीजिए और वे ख़त्म।
जो लेख आख़िर में सुझाए जाते हैं वे अभी सिर्फ़ English में हैं। सवाल और उनका जवाब पूरी तरह हिंदी में हैं।
ये सवाल आपको यह नहीं बता सकते कि आपके साथ क्या चल रहा है, और ये किसी जानकार से बात करने की जगह नहीं ले सकते। यहाँ की कोई बात भारी लगे, तो उसे किसी website पर सुलझाने के बजाय गंभीरता से लेना बेहतर है।अभी मदद चाहिए — यह पेज हमेशा एक क्लिक दूर है।
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